कहने को तो …

कहने को तो बोहोत कुछ है
जब सोचो तो कुछ भी नही
कभी लगता है दिल है मेरे पास
कभी लगता है की खो गया कहीं

आँखें मूंदो ….
…. तो कोई चेहरा नज़र नही आता
आँखें खोलो …
…. तो कोई इस दिल को नही भाता
कहने को तो मेरे पास हर कोई है
जब ढूँढो तो कोई भी नही
कभी लगता है अकेली हूँ मैं
कभी लगता है सब हैं यहीं

हँसना चाहो…
… तो कोई वजह नही भाती है
हँसना ना हो …
… तो ख़ुद पे हँसी आती है
कहने को तो वजह ढेरो हैं
जब देखो तो एक भी नही
कभी लगता है मुस्कुराना भूल गई मैं
कभी लगता है हँसी यहीं है कहीं

9 thoughts on “कहने को तो …

  1. Good one Garry, as I always say you are a not a lost poetess but a good poetess :p)
    A sad one though but too cool!!!!!!!

  2. a sad parody.. enjoy.. even if you dont like

    कहने को तो बहुत कुछ है
    जब सोचो तो और भी नयी
    कभी लगता है दिल है मेरे पास
    कभी लगता है सो गया कहीं

    आँखे मून्दों,,,
    तो कई चेहरे नज़र आते हैं
    आँखें खोलो…
    तो हर इस दिल को भाते हैं
    कहने को तो बहुत कुछ है
    जब सोचो तो और भी नयी
    कभी लगता है अकेली हूँ मैं
    कभी लगता है कोई भी नहीं

    हँसना चाहो,,
    तो हँसी आती है
    हँसना न हो
    तो comedy circus भाती है
    कहने को तो वजह ढेरों हैं
    जब देखो तो कब के ठहरे हैं
    कभी लगता है की मुस्कुराना याद आ गया
    कभी लगता है रोना भूल गयी मैं..

  3. ग़म के हुजूम बदल सकते ना तुम्हारी फितरत, गर आदत होती तुम्हारी यूँही मुस्कुराने की…!!

    good one..nonetheless🙂

  4. वाह वाह!!!! शायद मुझे पूरा समझ आ गया…. थोडी मेहनत्त करने के बाद…

    Thanks for visiting after ages😀

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